समाजशास्त्र के सिद्धांत
📖 समाजशास्त्र के प्रमुख सिद्धांत : एक सरल परिचय प्रस्तावना समाजशास्त्र (Sociology) वह विज्ञान है जो समाज, उसकी संरचना और उसमें होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है। समाज को समझने के लिए समाजशास्त्रियों ने कई सिद्धांत (Theories) दिए। ये सिद्धांत हमें यह जानने में मदद करते हैं कि समाज क्यों और कैसे चलता है, और उसमें असमानता या बदलाव क्यों आते हैं। --- 1️⃣ संरचनात्मक कार्यात्मकतावाद (Structural Functionalism) मुख्य प्रवर्तक: एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim), टैल्कट पार्सन्स मुख्य विचार: समाज एक जीवित शरीर (organism) की तरह है। इसमें हर संस्था (परिवार, शिक्षा, धर्म) का एक खास कार्य (function) होता है। यदि कोई संस्था सही से काम नहीं करती तो समाज में असंतुलन आ जाता है। उदाहरण: शिक्षा व्यवस्था → समाज को शिक्षित और अनुशासित नागरिक देती है। --- 2️⃣ संघर्ष सिद्धांत (Conflict Theory) मुख्य प्रवर्तक: कार्ल मार्क्स (Karl Marx) मुख्य विचार: समाज हमेशा संघर्ष (conflict) की स्थिति में रहता है। अमीर और गरीब, शोषक और शोषित, मालिक और मजदूर – इनका टकराव समाज को चलाता है। असमानता (inequality) ही समाज ...